अगोरी, बड़हर राज्य का आविर्भाव
अगोरी किला विजयगढ़ किला अगोरी, बड़हर तथा बिजयगढ़ रियासतों का आविर्भाव बारहवीं सदी से लेकर तेरहवीं सदी का यह,वह दौर था जब चन्देल, चौहान तथा गहरवार अपनी संप्रभुत्ता के लिए आपस में लड़ रहे थे। जाहिर है पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु दूसरे चौहानों के लिए बदला लेने का पाठ थी तथा चन्देलों की उस समय की खामोशी, चौहानों के लिए एक वर्जना कि चन्देल भी कम नहीं। चन्देल, कालिंजर से बाहर निकलने के लिए छट-पटा रहे थे तथा उन्हें यह भी गुमान था कि उन्होंने कुतुबुद्दीन ऐबक को नसीहत भी सिखा दिया है। भले ही उनके वंश के राजा परमार्दिदेव उससे पराजित हो गए थे। फिर भी यह ऐतिहासिक सचाई है कि दो सौ साल तक लगातार चन्देल राज-व्यवस्था का संचालन करते रहे थे। उसी समय चन्देलों और चौहानों की बेतवा नदी के किनारे सत्ता प्राप्ति या सत्ता समापन का युद्ध होता है, यह युद्ध भयानक तो था ही और राजपूतों के आपसी संघर्ष का भी प्रमाण था। युद्ध में चन्देलों की चौहानों से बहुत बड़ी पराजय होती है। बेतवा नदी के किनारे की चन्देलों की चौहानों से परजय कई मायनों में कुतुबुद्दीन ऐबक की हार से बड़ी थी। बेतवा नदी के आस-पास चन्देलों व चौहानों के यु...